न्यायिक अधिकारिता

 

दीवानी अधिकारिता

 

         दिल्ली एक सिविल जिला है जिसका प्रमुख जिला न्यायाधीश है। दीवानी मामलों की सुनवाई करने वाले अधिकतर दीवानी न्यायालय तीस हजारी स्थित जिला न्यायालय परिसर में स्थित हैं। इसके अतिरिक्त कड़कड़डूमा न्यायालय परिसर में भी २३ दीवानी न्यायाधीश दीवानी मुकद्मों की सुनवाई कर रहे हैं। दीवानी न्यायाधीशों को ३ लाख रूपए तक के मामलों की सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों के न्यायालयों में ३ लाख से लेकर २० लाख रूपए तक के मामलों की सुनवाई होती है। दीवानी न्यायाधीशों द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ अपील जिला न्यायाधीश के न्यायालय में दाखिल की जाती है। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में अपील की सुनवाई वरिष्ठ दीवानी न्यायाधीश के न्यायालय में भी की जाती है जैसेः-

)     मात्र १,०००/- रूपए तक के छोटेमोटे विवाद।

)     जमीन-जायदाद का मामला जिसकी विवादित राशि २५०/- रूपए से अधिक न हो।

)      एक ऐसा अवर्गीकृत मामला जिसकी विवादित राशि ५००/- रूपए से अधिक न हो।

 

दंड अधिकारिता

 

         दिल्ली के दंड न्यायालय तीस हजारी, कड़कड़डूमा तथा पटियाला हाउस न्यायालय परिसर में स्थित है। समस्त दिल्ली को दस पुलिस जिलों में विभाजित किया गया है। उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, पश्चिमी तथा मध्य दिल्ली के मामलों की सुनवाई तीस हजारी न्यायालय में होती है। कड़कड़डूमा न्यायालय में दिल्ली के पूर्वी तथा उत्तरपूर्वी जिलों से जुड़े मुकद्मों की सुनवाई होती है। इसके अतिरिक्त नई दिल्ली, दक्षिणी तथा दक्षिणी-पश्चिमी जिलों के मुकद्मों की सुनवाई पटियाला हाउस न्यायालय में होती है।

 

वैवाहिक अधिकारिता

 

         हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत शामिल सभी विषयों जैसे तलाक, दांपत्याधिकारों का प्रत्यास्थापन (वापस लेना तथा स्थतई गुजारा भत्ते इत्यादि से संबंधित मामले केवल विवाह विषयक न्यायालयों में सुने जाते हैं। विवाह विषयक मामलों के लगभग आधा दर्जन न्यायलय परिसर में स्थित हैं, जबकि दो न्यायालय कड़कड़डूमा न्यायालय परिसर में कार्य कर रहे हैं।

 

श्रम मामलों की अधिकारिता

 

         दिल्ली के अंदर तीन औद्धोगिक ट्रिब्यूनल तथा २५ श्रम न्यायालय हैं, जो कड़कड़डूमा न्यायालय परिसर में स्थित हैं। ये सभी न्यायालय दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के पीठासीन अधिकारियों द्वारा चलाई जा रही हैं। श्रा न्यायालय औद्धोगिक विवाद तथा श्रम कानूनों के अन्तर्गत मालिक और कर्मचारी/श्रमिक के बीच उभरे सभी तरह के विवादों की सुनवाई करते हैं।

         श्रम न्यायालयों में नियोक्ता और श्रमिक विवाद के बहुत से मामले, सुलह अधिकारी की विफलता रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत सरकार द्वारा भेजे जाते हैं, लेकिन कुछ मुकद्में व्यथित पार्टियों द्वारा साधे भी न्यायालय में दाखिल किये जा सकते हैं।

 

मोटर दुर्घटना मामलों की अधिकारिता

 

         मोटर दुर्घटना में हुए जीवन/सम्पत्ति के ह्रास तथा शारीरिक/मानसिक क्षति के दावों की सुनवाई मोटर दावा अधिकरण में होती है। वर्तमान समय में कड़कड़डूमा के दो तथा पटियाला हउस के तीन ट्रिब्यूनलों के अतिरिक्त तीस हजारी न्यायालय परिसर में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के १० न्यायालय हैं। ट्रिब्यूनलों में पेश किए जाने वाले मामले प्रभावित व्यक्ति द्वारा स्वयं या अधिवक्ता की सहायता से सीधे दाखिल किए जाते हैं। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एम..सी.टी.) न्यायालय के पीठासीन अधिकारी/न्यायाधीश दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी होते हैं।

 

बाल (किशोर) न्याय बोर्ड

 

        अपराध में संलिप्त बच्चों की देखभाल तथा सुरक्षा हेतु बनाए गए बाल न्याय (देखभाल व संरक्षण) अधिनियम २००० के अधिनियमित होने के उपरांत बाल न्याय बोर्ड के द्वारा बाल न्यायालयों की स्थापना की गई। बाल न्यायालय का पीठासीन अधिकारी एक महानगर दण्डाधिकारी होता है जो बतौर प्रमुख दण्डधिकारी कार्य करता है। इसके अतिरिक्त दो समाजसेवी भी होते हैं जिसमें से एक महिला होती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बाल न्यायालय बोर्ड दिनांक ०१.०६.२००३ से अपना कार्य कर रहा है।

 

 

भिखारियों की अदालतें

 

विशेष महानगर दण्डाधिकारी

 

नगर मैजिस्ट्रेट के तौर पर नियुक्त

विशेष महानगर दण्डाधिकारी

 

नगर मैजिस्ट्रेट

(गंदगी फैलाने, सफाई तथा जन स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की सुनवाई)

 

महिला अदालतें

 

पंचायती अदालतें

 

राजस्व अदालतें

 

विशेष कार्यपालक मैजिस्ट्रेट

 

उप-खंडाय मैजिस्ट्रेट